मानव के क्रमिक’ विकास का रोचक इतिहास | Human Evolution History in hindi

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Human Evolution History in hindi

Human Evolution History in hindi नमस्कार दोस्तों मैं हूं मनीष और आपका स्वागत है स्टोरी हिंदी में दोस्तों आज के वीडियो में आप जानेंगे कि लाखो साल पहले मानव अस्तित्व की शुरुआत कैसे हुई इसके अलावा आप यह भी जानेंगे कि सर्वप्रथम अफ्रीका में मानव प्राणियों की उत्पत्ति कैसे हुई और पुरातत्व विज्ञानियों ने इतिहास के प्रारंभिक चरणों के बारे में हड्डियां और पत्थरों के औजारों के अवशेषों की सहायता से कैसे अध्ययन किया पुरातत्व विज्ञानियों ने प्रारंभिक मानव के जीवन के बारे में पुनर्निर्माण करने के प्रयत्न किए हैं उन्होंने यह जानने की कोशिश की कि वे कैसे घरों में रहते थे पेड़ पौधों से उत्पन्न कंदमूल एवं बीजों को इकट्ठा करके जानवरों का शिकार करके अपना भरण-पोषण करते थे इसके अलावा किन-किन तरीकों से अपने भावों एवं विचारों को अभिव्यक्त करते थे

Human Evolution History in hindi आप यह भी जानेंगे कि आदमी द्वारा आग और भाषा का प्रयोग कब और कैसे शुरू हुआ और अंत में आप देखेंगे कि आज की दुनिया में भी जो लोग शिकार और पेड़ पौधों से प्राप्त खाद्य सामग्रियों से अपना भरण-पोषण करते हैं उनके जीवन का अध्ययन करके अतीत के बारे में जानकारी मिल सकती है मानव की क्रमिक विकास की कहानी कब और किस रूप में सर्वप्रथम अस्तित्व में आया यह कहना मुश्किल है मगर ऐसा समझा जाता है कि लगभग 5600000 वर्ष पहले पृथ्वी पर ऐसे प्राणियों का उद्भव हुआ था जिन्हें हम मानव कह सकते हैं इसके बाद आदि मानव के कई रूप बदले और कालांतर में लुप्त हो गए आज हम जिस रूप में मानव को देखते हैं जिन्हें हमने आगे चलकर आधुनिक मानव कहा वैसे लोग 108000 साल पहले पैदा हुए थे लगभग 8000 मानव इतिहास के दौरान लोग दूसरों द्वारा मारे गए या प्राणियों के शरीर में से निकालकर जानवरों का शिकार करके अपना पेट भरते थेकंदमूल फल और बीज आदि बटोर कर अपना पेट भरते थे धीरे-धीरे उन्होंने पत्थरों से औजार बनाने पर आपस में बातचीत करना भी सीख लिया कि आगे चलकर मानव ने भोजन जुटाने के कई और तरीके भी अपना लिए थे और सिर करके यानी इधर उधर से खाने की चीज बटोरने का तरीका भी चलता रहाआज भी दुनिया की कुछ भागों में ऐसे शिकारी संग्राम समाज यानि हंटर गैदरर सोसाइटीज है जो शिकार और संग्रहण से अपने भोजन की व्यवस्था करते हैं इसीलिए विशेषज्ञों को लगता है कि आज के शिकारी संग्राहक लोगों के जीवन शैली का अध्ययन करके हमें अतीत के बारे में कुछ जानकारी जरूर मिल सकती है आज हमें आदिमानव के इतिहास की जानकारी मानव के जीवाश्म यानी पत्थर के औजार और गुफाओं के चित्र कारियों की खोजों से मिलती है इनमें से प्रत्येक खोज का अपना एक इतिहास है परी जैसी खोजें सर्वप्रथम की गई अधिकांश विद्वानों ने यह मानने से इनकार कर दिया कि वह प्रारंभिक मानव के हैं वैज्ञानिकों को आदिमानव की चित्रकारी करने और पत्थरों के अवसर बनाने की योग्यता पर शक था एक अरसे के बाद ही इन वैज्ञानिकों ने इन जीवाश्म औजारों और चित्र कारियों के सच्चे महत्व को स्वीकार किया मानव का विकास क्रमिक रूप से हुआ इस बात का साल भर में मानव की उन प्रजातियों यानी कि स्पीशीज के जीवाश्म से मिलता है जो अब लुप्त हो चुकी है उनकी विशेषताओं शारीरिक लक्षणों के आधार पर मानव को विभिन्न प्रजातियों में बांटा गया है जीवाश्म की तिथि का निर्धारण प्रत्यक्ष रासायनिक विश्लेषण द्वारा द्वारा उन पर तो या तो Human Evolution History in hindi छोटों के काल का परोक्ष रूप से निर्धारण करके किया जाता है जिनमें वे दबे हुए पाए जाते हैं जब एक बार जीवाश्म के तृतीय निकाल का पता चल जाता है तब मानव विकास का क्रम निर्धारित करना कठिन नहीं रहता लगभग 200 वर्ष पहले सर्वप्रथम जब ऐसी खोजे की गई तब अनेक विद्वान के मानने को तैयार नहीं थे कि खुदाई में मिले जीवाश्म और पत्थर के औजार तथा चित्र कारियों जैसी अन्य चीजें वास्तव में मनुष्य के आदिकालीन रूप से संबंध रखती थी |

आधुनिक मानव के पूर्वज मानव के विकास के क्रम को 360 से 240 वर्ष पहले तक हो जा जा सकता है यह वह समय था जब एशिया तथा अफ़्रीका में स्तनपाई प्राणियों के प्राइवेट नामक श्रेणी का उद्भव हुआ था उसके बाद लगभग 200 4000000 साल पहले प्राइवेट श्रेणी में कसम उत्पन्न हुआ जिसे होमी नाईट कहा गया है इस समूह में 1 दिन यानी एक शामिल थे और फिर बहुत समय बाद लगभग 5600000 वर्ष पहले  हमें पहले होमिनेट प्राणियों के अस्तित्व का साक्षी मेला होमिनेट वर्ग हो मिना डोप समोसे विकसित हुए उनमें अनेक समानताएं पाए जाते हैं लेकिन कुछ बड़े अंतर भी है होमिनोइड्स का मस्तिष्क उम्मीदों की तुलना में छोटा होता था वह शॉप आए थे यानी चार पैरों के बल चलते थे लेकिन उनके शरीर का अगला हिस्सा और अगले दोनों पैर लचकदार होते थे इसके विपरीत हमें सीधे खड़े होकर पिछले दो पैरों के बल चलते थे उनके हाथ विशेष किस्म के होते थे

Human Evolution History in hindiजिनकी सहायता से बेज़ार बना सकते थे और उनका इस्तेमाल भी कर सकते थे | दो प्रकार के साथियों से यह दो प्रकार के साक्ष्यों से यह पता चलता है कि हो मिनिटोंका अफ्रीका में हुआ था पहला तो यह कि अफ्रीकी वानर हो यानी एप्स का समूह में निर्दोष है बहुत गहराई से जुड़ा है दूसरा सबसे प्राचीन हो मिनट देवास में जो ऑस्ट्रेलोपीथिकस वंश के हैं पूर्वी अफ़्रीका में पाए गए हैं और उनका समय लगभग 5600000 वर्ष पहले का माना जाता है इसके विपरीत अफ्रीका से बाहर पाए गए जीवाश्म 1800000 वर्ष से से अधिक पुराने नहीं है ओमिनी ओमिनी डे नामक परिवार के सदस्य होते थे Human Evolution History in hindi

इस परिवार में सभी रूपों के मानव प्राणी शामिल थे वह मिनिट समूह की अनेक विशेषताएं थी जिससे मस्तिष्क का बड़ा आकार पैरों के बल सीधे खड़े होने की क्षमता दो पैरों के बल चलना हाथ के विशेष क्षमता जिससे व्यवहार बना सकते थे और उनका इस्तेमाल कर सकते थे आगे कई शाखाओं में विभाजित किया जा सकता है शाखाओं को जीनस कहते हैं इन शाखाओं में ऑस्ट्रेलॉर्प एक और होमो अधिक महत्वपूर्ण है इन शाखाओं में प्रत्येक की कई प्रजातियां होती है एलोपैथिक के बीच कुछ बड़े अंतर उनके मस्तिष्क के आकार जबड़े और दातों के संबंध में पाए जाते हैं ऑस्ट्रेलोपीथिकस का आकार की अपेक्षा बड़ा होता है जब बड़े अधिक भारी होते हैं और दांत भी ज्यादा बड़े होते हैं दरअसल इन प्रजातियों को वैज्ञानिकों द्वारा जो नाम दिए गए हैं वे सभी भाषाओं के शब्दों से ही बने हैं उदाहरण के लिए ऑस्ट्रेलोपीथिकस भाषा के दक्षिणी और यूनानी भाषा के शब्दों से मिलकर बना है इसलिए दिया गया क्योंकि मानव के आरोप में उसके अवस्था के अनेक राज्यों की तुलना में मस्तिष्क का अपेक्षाकृत छोटा होना पिछले दांत बड़े होना और हाथों की तक सीमित हो ना उसमें सीधे खड़े होकर चलने की क्षमता भी अधिक नहीं थी क्योंकि वह अभी भी अपना बहुत समय पेड़ों पर ही गुजरता था इसलिए उसमें पेड़ों पर जीवन जीने के लिए आवश्यक अन्य विशेषताएं अपी मौजूद थे Human Evolution History in hindi

औजार बनाने और लंबी दूरी तक पैदल चलने की क्रिया में बढ़ोतरी होती गई तब मानवीय विशेषताओं तथा लक्षणों का विकास भी होता गया आदिकालीन मानवों के अवशेषों को भिन्न-भिन्न प्रजातियों में वर्गीकृत किया गया इन प्रजातियों को अक्सर उनकी हड्डियों के रचना में पाए जाने वाले यंत्रों के आधार पर एक दूसरे से अलग किया जाता था उदाहरण के लिए प्रारंभिक मानव प्रजातियों को उनके खोपड़ी के आकार और जबड़े की विशिष्टता के आधार पर बांटा गया है यह विशेषता है पॉजिटिव फीडबैक मेकैनिज्म विद परिणाम प्राप्त होने से विकसित हुई होंगी उदाहरण के लिए दो पैरों पर खड़े होकर चलने की क्षमता के कारण बच्चों को उठाकर ले जाने के लिए मुक्त हो गए और जो जो हाथों का इस्तेमाल भरता गया दो पैरों पर चलने की भी बढ़ती गई इससे विभिन्न प्रकार के काम करने के लिए स्वतंत्र हो जाने का लाभ तो मिला है साथ ही पैरों की बजाय दो पैरों पर चलने की शारीरिक ऊर्जा की खपत भी कम होने लगी लेकिन दौड़ते समय उल्टा हो गया तो लिहाज से यह पता चलता है 

 

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